संवेदना

संवेदना का एक दीप जलाना आज है,
अंधेरा जो घना है, मिटाना आज है।
फैली है जो नफरत इस दुनिया में बहुत,
इस नफरत को मिटाना जरूरी आज है।
निरक्षरता समाज की दीमक
जो लिपटी आज है,
साक्षरता की सुनहरी चमक से हटाना आज है।
रोशन हो भविष्य आने वाली पीढ़ी का,
तो समृद्धि का जोर लगाना आज है।
संवेदना का एक दीप जलाना आज है।

Comments

  1. हमारी एक छोटी-सी पहल भी समाज में एक बङा बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा पायेगी। 😃😃

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