तुम
संगीत के सुरों का वो राग हो तुम,
भटके हुए पथिक का ध्रुव तारा हो तुम,
जिंदगी का अनूठा साज हो तुम,
इस समाज का बेशकीमती ताज हो तुम,
मन का सजाया वो रंगीन ख्वाब हो तुम,
सुनसान अंधेरों में रोशन प्रकाकाश हो तुम,
अंतस का अटूट विश्वास हो तुम,
न जाने कौन हो मेरे तुम
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