एक शाम उनकी

एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ
यादों के कई गुब्बार मैं वहाँ खाली कर आता हूँ
कुछ नई कुछ पुरानी यादों को बिखेर आता हूँ
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ

छोङ आता हूँ कुछ हसीन फल उन अनजान राहों के
याद कर कुछ लम्हे साथ बटोर लाता हूँ
वक्त जब मिला करता हूँ याद उनकी बातों को
वैसे तो उनकी हर बात को अपने जेहन में समेट लाता हूँ
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ

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