दीपोत्सव

दीपोत्सव से मनी दिवाली,
              जग - मग, जग - मग रोशन जग में 
खुशियाँ लाई कोटि - कोटि की, 
               श्रीराम की भव्य अगवानी में। 
महावीर जब मोक्ष सिधारे, 
            मन मंदिर हर्षित उर में
जग सारा खुशहाल हो गया,
             तमस स्वयं हर लेने में।
रोम - रोम हर्षित हो जाता,
             स्वर्णमयी उज्जवल क्षण में
बैर, क्रोध जब मिट जाता तो,
             प्रेम वृक्ष खिलता उर  में।
दीपोत्सव से मनी दिवाली,
             जग - मग, जग - मग रोशन जग में।

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