जन्मदिन से संघर्ष तक

कितने सुरक्षित होते हैं हम अपनी मां की कोख में,
बाहरी दुनिया के अनुचित क्रियाकलापों से।
होता है वो अनुभव और स्नेह साथ,
जो बना देता है हमें एकदम साहसी।
बाहरी दुनिया से रुबरू होने वाले, 
पहले और बाद के संघर्षों के लिए।
जब आते हैं हम इस दुनिया में,
अनेक संघर्षों का सामना कर।
तब आती है असहनीय पीढा से गुजरी, 
हमारी मां के चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान।
खिल जाता है वो हर एक चेहरा
और होती है तैयारी जश्न की हमारे 'जन्मदिन' की।
मिलते हैं शुभाशीष हमें स्वजनों के, 
भर जाते हैं हम आत्मीय भावनाओं से।
हम बनते हैं साहसी, निडर, कठोर, हृदय की कोमल भावनाओं को साथ लिए असीम प्रेम और विश्वास, समझ जैसी कई अनुभूतियाँ लिए बाहरी दुनिया के संघर्षों के लिए।

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